नई दिल्ली। आपने आजतक कितने फोन नंबर हैं? कई लोग तो हर 6 महीने पर नंबर बदल लेते हैं। वहीं, कई लोग एक ही नंबर को सालों तक इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपने कभी यह सोचा है कि जब आप एक नया फोन नंबर लेते हैं तो आपके पुराने फोन नंबर का क्या होता है? मोबाइल कंपनियों अक्सर पुराने नंबर्स को रिसाइकल कर देती हैं और नए उपयोगकर्ता को अनुबंध कर देती हैं। पुराने नंबर से जुड़ा डेटा एक्सेसरी करना आसान हो जाता है
टेलिकॉम कंपनियां ऐसा इसलिए करती हैं ताकि नंबर की तादाद न बढ़ जाए। लेकिन यह प्रक्रिया उन यूजर्स के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं होती है जिनकी संख्या को रिसाइकल किया जा रहा है। जब आपका पुराना नंबर नया उपयोगकर्ता को मिलता है तो पुराने नंबर से जुड़ा डेटा भी नए यूजर्स के लिए सामान करना आसान हो जाता है। यह यूजर्स की गोपनियता और कोज्ञा और सिक्योरिटी को जोखिम में डाल सकता है।

नए यूजर्स, पुराने यूजर्स की जानकारी को एक्सेस कर सकते हैं
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की नई फाइंडिंग्स के अनुसार, नंबर नंबर यूजर्स की सुरक्षा और गोपनीयता को जोखिम में डाल सकता है। रिसाइकल्ड नंबर्स के द्वारा नए यूजर्स, पुराने यूजर्स के नंबर की जानकारी को एक्सेस कर सकते हैं। जब आप अपना नंबर बदल रहे हैं तो आप तुरंत सभी डिजिटल खातों में अपना नया नंबर अपडेट करना भूल जाएंगे। उदाहरण के लिए: ऐसा संभव है कि आप अभी भी किसी ई-कॉमर्स ऐप में अपने पुराने नंबर का ही इस्तेमाल कर रहे हों।

रिसाइकल नंबर की संवेदनशील जानकारी प्राप्त की
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट से पता चला है कि नई नंबर मिलने के बाद एक पत्रकार को ब्लड टेस्ट के रिजल्ट और स्पा अपॉइंटमेंट रिजर्वेशन्स के मैसेजेज आने शुरू हो गए थे। एक रिसर्चर अरविंद नारायणन ने रिपोर्ट में बताया, “हमने एक सप्ताह के लिए 200 रिसाइकल नंबर्स के लिए और पाया कि उनमें से 19 अभी भी पुराने उपयोगकर्ता की सिक्योरिटी / प्राइवेसी सेंसिटिव कॉल्स और मैसेज प्राप्त कर रहे हैं। इसमें ऑथेंटिकेशन पासकोड, प्रीसक्रिप्शन रीफिल रिमाइंडर शामिल हैं। आदि शामिल थे। जिन यूजर्स को अनजाने में रिसाइकल नंबर दिया गया है उन्हें संवेदनशील मैसेजेज या जानकारी प्राप्त हो गई है। “”

अनुसंधानकर्ताओं ने eight संभावित मामलों की एक सूची तैयार की
रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्चर्स ने eight संभावित मामलों की एक सूची तैयार की है जो नंबरलाइट के कारण हो सकते हैं। मुख्य बुकिंग में से यह यह है कि अगर, जिसके पास यह नंबर पहले था उस पर फिंशिंग अटैक हुए हैं तो किस रिसाइकल कर यह नंबर दोबारा दिया जा रहा है उसके साथ भी एसएमएस के जरिए फिशिंग अटैक हो सकते हैं। जब संदेश विश्वसनीय लगते हैं तो यूजर्स फिशिंग अटैक में फंस जाते हैं। अटैकर्स इन नंबर्स का इस्तेमाल विभिन्न उपस्थिति, नया पत्र, अभियान और रोबोकॉल के लिए साइन अप करने के लिए भी कर सकते हैं। अटैकर रिसाइकल नंबर का इस्तेमाल एसएमएस-प्रमाणित पासवर्ड रीसेट के लिए भी कर सकता है।

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने अमेरिका स्थित वेरिजोन और टी-मोबाइल सहित टेलिकॉम कंपनियों से बात की लेकिन इन कंपनियों ने संभावित हमलों को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया है। रिपोर्ट में बताया गया है, “हमने दो सबसे बड़ी अमेरिकी टेलिकॉम कंपनी वेरिजोन और टी-मोबाइल के एक-एक प्रीपेड अकाउंट के लिए साइन अप किया है। यह दोनों कंपनियां अपने सब्सक्राइबरों के लिए अपना फोन नंबर बदलने के लिए अपने मोबाइल इंटरफेस प्रदान करती हैं। हैं।



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